Tea Price Crash: इन देशों ने किया भारत की चायपत्ती लेने से इनकार, कहा- किटनाशक बहुत ज्यादा…

14:46, 7 June, 2022, Views - 410
Tea Price Crash:
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Tea Price Crash: तुर्की ने कुछ दिन पहले भारत को गेहूं को वापस लौटाते हुए कहा कि इसमें कीटनाशक की मात्रा बहुत ज्यादा है, जिस के बाद देश में गेंहुं निर्यात पर भारी प्रभाव पड़ा। अब भारत की सबसे प्रसिद्द चाय पर भी इसका असर देखने को मिला, कई देशों ने भारत की चाय पती को रिजेक्ट करके हुए ये कहा की इसमें कीटनाशकों और रसायनों की मात्रा बहुत अधिक है। इंटरनेशनल लेवल पर भारत की चायपती का ऐसे रिजेक्ट होना भारतीय चाय उत्पादकों के लिए एक परेशानी की वज ह भी बन गया है।

जब से इंटरनेशनल मार्केट में चायपत्ती रिजेक्ट हुई है तबसे भारत के बाजार में चायपत्ती के भावों बड़ी गिरावट देखने को मिली है। भारतीय चाय की अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों बाजारों से खेप वापस करने के बाद इसकी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।चाय की पत्तियों में कीटनाशकों और रसायनों की मात्रा अधिक होने के कारण खरीदारों ने इसे लेने से मना कर दिया।

अब चाय की कीमतों में 30-40 रुपये प्रति किलो की गिरावट ने चाय उत्पादकों के लिए टेंशन बढ़ा दी है। अब सवाल यह है कि इससे कैसे निपटा जाए? कीटनाशकों और रसायनों का उपयोग किए बिना उपज पर प्रभाव पड़ेगा, तो क्या किया जाना चाहिए? क्या यह प्राकृतिक खेती की ओर मुड़ने का समय है?

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एक महीने में 27 रुपये की गिरावट

पिछले एक महीने में चाय की पत्तियों का भाव में 27 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई है और इसकी कीमत 214 प्रति किलोग्राम से गिरकर 187.06 प्रति किलोग्राम हो गई है। चाय उद्योग इस बास से चिंतित है कि कहीं इसकी वजह से दूसरे सीजन के दौरान चाय की कीमतें और ना कम हो जाएं। इसपर किसी भी तरह का असर चाय उद्योग को प्रभावित कर सकता है। देश में बेची जाने वाली सभी चाय भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के मानदंडों के अनुरूप होनी चाहिए।

Tea Price Crash:

पिछले एक महीने में चाय की पत्तियों की कीमत 27 रुपये प्रति किलो गिर गई है और इसकी कीमत 214 रुपये प्रति किलो से गिरकर 187.06 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। चाय उद्योग इस बात को लेकर चिंतित है इसके कारण दूसरे सीजन के दौरान चाय की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। जिससे इसका असर चाय उद्योग पर पड़ सकता है। देश में बेची जाने वाली सभी चाय भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मानदंडों के अनुरूप होनी चाहिए।

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लौटा दी गई थी चाय
हाल ही में, चायपत्तियों में कीटनाशकों और रसायनों की निर्धारित मात्रा से अधिक मात्रा पाई गई थी जिसके कारण चाय व्यापारियों ने अपनी खरीद रद्द कर दी। कोलकाता की नीलामी में खरीदारों ने करीब 39 हजार किलो चाय लौटा दी। कीमतों की बात करें तो इसमें साल दर साल करीब 40 रुपये प्रति किलो की कमी आई है। पिछले साल चाय 226.77 रुपये प्रति किलो की दर से बिकी थी, लेकिन इस साल इसकी औसत कीमत 186।41 रुपये प्रति किलो है।

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मांग में गिरावट

वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक, चाय की कीमतों में गिरावट का कीटनाशकों और रसायनों के मुद्दे से कोई लेना-देना नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चाय की मांग कम रही है। भारतीय चाय की मांग मुख्य रूप से केन्या से चाय की कम कीमतों के कारण घटी है। यदि चाय में अधिक कीटनाशकों और रसायनों के मुद्दे के कारण निर्यात में कमी आती है, तो घरेलू बाजार में चाय की कीमतों में भी गिरावट आएगी। श्रीलंका में आर्थिक संकट के कारण भारतीय चाय उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना कारोबार बढ़ाने का एक बड़ा अवसर मिला, कीटनाशकों और रसायनों के सीमा से अधिक उपयोग ने एक बड़ा झटका दिया है।

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बढ़ा है कीटनाशक का इस्तेमाल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के कारण चाय की पत्तियों पर कीड़ों का हमला बढ़ गया है। इसके कारण चाय बागानों में कीटनाशकों के प्रयोग में वृद्धि हुई है, ताकि चाय की पत्तियों को कीड़ों से बचाया जा सके। अक्सर कीटनाशक का प्रयोग समाप्त होने के बाद ही पत्तियों को तोड़ा जाता है। इसका कारण यह है कि चाय की पत्तियों पर कीटनाशक के निशान रह जाते हैं।

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आमतौर पर कीटनाशक के छिड़काव के लगभग 10 से 20 दिनों के बाद पत्तियों को तोड़ा जाता है। यदि इसका पालन नहीं किया जाता है, तो उनमें अधिक कीटनाशक होने का खतरा होता है। भारतीय चाय बोर्ड ने 25 मई को सभी उत्पादकों और दलालों को निगरानी करने का निर्देश जारी किया था, ताकि नीलामी के दौरान एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा किया जा सके।

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